guzre ta'alluqaat ka ab vaasta na de | गुज़रे तअ'ल्लुक़ात का अब वास्ता न दे

  - Afzal Alvi
गुज़रेतअ'ल्लुक़ातकाअबवास्तादे
गुमहोचुकीकिताबजोउसकापतादे
अबतज़्किरेछेड़मिरेअहद-ए-शौक़के
जोबुझगईहैआगउसेफिरहवादे
कुछइसक़दरफ़रेबसहारोंसेखाएहैं
मैंगिरपड़ूँगाख़ौफ़सेतूआसरादे
जिसकीजबीन-ए-शौक़पेलिक्खाथामेरानाम
अबदूरजाबसाहैतूशायदभुलादे
शो'लाजोमौजज़नहैमोहब्बतकादिलमेंआज
डरहैकिसरसर-ए-ग़म-ए-दौराँबुझादे
गोचलपड़ाहूँदिलसेमगरचाहताहूँये
उठकरमुझेवोरोकलेऔररास्तादे
ख़ालीकोईदौलत-ए-इख़्लाससेरहे
'अल्वी'किसीकोभूलकेयेबद-दुआ'दे
  - Afzal Alvi
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