main KHaak men mile hue gulaab dekhta raha | मैं ख़ाक में मिले हुए गुलाब देखता रहा

  - Afzaal Firdaus
मैंख़ाकमेंमिलेहुएगुलाबदेखतारहा
औरआनेवालेमौसमोंकेख़्वाबदेखतारहा
किसीनेमुझसेकहदियाथाज़िंदगीपेग़ौरकर
मैंशाख़परखिलाहुआगुलाबदेखतारहा
खड़ाथामैंसमुंदरोंकोओकमेंलिएहुए
मगरयेशख़्सअजीबथासराबदेखतारहा
वोउसकामुझकोदेखनाभीइकतिलिस्मथामगर
मैंऔरइकजहाँपस-ए-नक़ाबदेखतारहा
वोगहरीनींदसोईथीमैंनींदसेलड़ाहुआ
सोरातभरसहाबमाहताबदेखतारहा
सियाहरातमेंरफ़ीक़दुश्मनोंसेजामिले
मैंहौसलोंकीटूटतीतनाबदेखतारहा
  - Afzaal Firdaus
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