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Aditya Kumar 'Chaudhary'
waapsi ki aas ka marna hi marna hai
waapsi ki aas ka marna hi marna hai | वापसी की आस का मरना ही मरना है
- Aditya Kumar 'Chaudhary'
वापसी
की
आस
का
मरना
ही
मरना
है
इस
जहाँ
में
फिर
हमें
अब
क्या
ही
करना
है
- Aditya Kumar 'Chaudhary'
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दिल
को
तेरी
चाहत
पे
भरोसा
भी
बहुत
है
और
तुझ
से
बिछड़
जाने
का
डर
भी
नहीं
जाता
Ahmad Faraz
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हर-चंद
ए'तिबार
में
धोके
भी
हैं
मगर
ये
तो
नहीं
किसी
पे
भरोसा
किया
न
जाए
Jaan Nisar Akhtar
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ये
दिल
मलूल
भी
कम
है
उदास
भी
कम
है
कई
दिनों
से
कोई
आस
पास
भी
कम
है
हमें
भी
यूँं
ही
गुजरना
पसंद
है
और
फिर
तुम्हारा
शहर
मुसाफ़िर-शनास
भी
कम
है
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Farhat Abbas Shah
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जहाँ
तक
मुझ
सेे
मतलब
है
जहाँ
को
वही
तक
मुझको
पूछा
जा
रहा
है
ज़माने
पर
भरोसा
करने
वालों
भरोसे
का
ज़माना
जा
रहा
है
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Naeem Akhtar Khadimi
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ख़्वाब
के
आस
पास
रह
रह
कर
थक
गया
हूँ
उदास
रह
रह
कर
Shahbaz Rizvi
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वो
जिसकी
याद
ने
जीना
मुहाल
कर
रखा
है
उसी
की
आस
ने
मुझको
सँभाल
कर
रखा
है
सियाह
रातों
में
साए
से
बातें
करता
है
तुम्हारे
ग़म
ने
नया
रोग
पाल
कर
रखा
है
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Harsh saxena
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तू
कहीं
आस-पास
था
वो
तिरा
इल्तिबास
था
मैं
उसे
देखता
रहा
फिर
मुझे
नींद
आ
गई
Rais Farog
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हैं
बाशिंदे
उसी
बस्ती
के
हम
भी
सो
ख़ुद
पर
भी
भरोसा
क्यूँ
करें
हम
Jaun Elia
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दीवारें
छोटी
होती
थीं
लेकिन
पर्दा
होता
था
तालों
की
ईजाद
से
पहले
सिर्फ़
भरोसा
होता
था
Azhar Faragh
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हम
घूम
चुके
बस्ती
बन
में
इक
आस
की
फाँस
लिए
मन
में
Ibn E Insha
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तुम
भी
बेहाल
थे
हम
भी
बेहाल
थे
थी
मुहब्बत
सो
ख़ुश
और
आमाल
थे
याद
है
क्या
तुम्हें
वो
मिलन
आख़िरी
अश्रुओं
से
जो
भीगे
हुए
गाल
थे
मन
में
हलचल-सी
थी
दिल
ये
बेचैन
था
पसरे
जीवन
के
आगे
जो
जंजाल
थे
सोचता
हूँ
मैं
जब
भी
वो
दिन
वस्ल
के
सोचता
हूँ
कि
दिन
कितने
ख़ुशहाल
थे
दूसरी
बेंच
पर
था
मैं
बैठा
हुआ
तुम
जो
आए
हुए
फिर
बुरे
हाल
थे
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Aditya Kumar 'Chaudhary'
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दिख
रहा
हर
तरफ़
ग़म
का
साया
मुझे
तुमने
छोड़ा
नहीं
तुमने
मारा
मुझे
होती
ग़ज़लें
नहीं
अब
मुकम्मल
मिरी
याद
आते
नहीं
तुम
है
शिकवा
मुझे
तेरी
यादों
से
अब
ये
भरे
हैं
नहीं
लगता
दुश्मन
है
मेरा
ही
बस्ता
मुझे
था
पता
मुझको
इक
दिन
चली
जाओगी
बस
इसी
दर्द
का
पहले
डर
था
मुझे
हाए
कैसे
जिया
हूँ
मैं
इन
सालों
में
मुझ-सा
लगता
न
कोई
बेचारा
मुझे
है
शिकायत
मुझे
अब
दरीचों
से
भी
तेरा
चेहरा
न
अब
तक
दिखाया
मुझे
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Aditya Kumar 'Chaudhary'
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बा'द-ए-शब-ए-विसाल
से
आगे
की
चीज़
है
ये
ज़िंदगी
मलाल
से
आगे
की
चीज़
है
क्या
ही
कहूँ
ए
दोस्त
मैं
उसके
मिजाज़
का
वो
शख़्स
तो
कमाल
से
आगे
की
चीज़
है
है
प्यार
मुझको
आप
से
कह
तो
सका
नहीं
ये
तो
मेरी
मजाल
से
आगे
की
चीज़
है
उसके
रुमाल
के
सिवा
तो
कुछ
है
ही
नहीं
लेकिन
वो
भी
रुमाल
से
आगे
की
चीज़
है
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Aditya Kumar 'Chaudhary'
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आप
भी
चल
दिए
याद
भी
आपकी
मुझको
खाती
रही
फिर
कमी
आपकी
Aditya Kumar 'Chaudhary'
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बे-वफ़ाई
पे
दुनिया
ये
जो
भी
कहे
पर
समझता
हूँ
मैं
बेबसी
आपकी
Aditya Kumar 'Chaudhary'
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