हरबारमेरेदर्दमेंरोयाहैआसमाँ
इसबारदेरहेहैंमगरसाथदो-जहाँ
ऐसेनहींपनपतेहैंबंदेमिरीतरह
फिरताहैबेटेमुद्दतोंख़ालिक़जहाँतहाँ
ख़ुदकुछनहींहैउँगलियाँऔरोंमेंकररहा
इतनाहीकामरहगयाक्यापासमेंजहाँ
कलसबतमाशादेखकेघरपरचलेगए
औरझोपड़ेसेऐसेहीउठतारहाधुआँ
ख़ालिक़भीहाथपोंछकेकमरेमेंघुसगया
पूरीहयातदर्दमेंकरतारहाफ़ुग़ाँ
चाहेअभीनिकालदोतुमग़मनहींमुझे
सारेजहाँकेदिलमेंमिराहोगयामकाँ
मेरीसुख़न-वरीकातोअंदाज़हीअलग
अहल-ए-ज़मींमेंमुझसासुख़न-वरहुआकहाँ
दोनोंजहाँकाहालबयाँएकशे'रमें
तेरीतरह'प्रशांत'सुख़न-वरनहींयहाँ