zamaane men mohabbat ke bahut beemaar baithe hain | ज़माने में मोहब्बत के बहुत बीमार बैठे हैं

  - Prashant Kumar
ज़मानेमेंमोहब्बतकेबहुतबीमारबैठेहैं
सहीहोतानहींहैएकसौतैयारबैठेहैं
उसीनुक्कड़पेपूरेदिनबसआँखेंसेंकतेहैंसब
मानोजाकेदेखोतुमअभीदोचारबैठेहैं
गलीमेंताकतेहीताकतेगुज़रीहैसबकीउम्र
मानोदेखलोघरआकेसबबेकारबैठेहैं
किकोईबेचताहैआमकोईसिलरहाचप्पल
कितुमसेेकौनकहताहैसभीबेकारबैठेहैं
करेंतोक्याकरेंफिरनौकरीमिलतीनहींहमको
अबअपनेजुर्मकाहीलेकेकारोबारबैठेहैं
सुनाहैछोकरीऐसेनहींमिलतीकिसीकोभी
इसीचक्करमेंसाँसोंकालिएव्यापारबैठेहैं
  - Prashant Kumar
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