ye zameen baam-e-falak ho ga.e jin kabse alag | ये ज़मीं बाम-ए-फ़लक हो गए जिन कबसे अलग

  - Prashant Kumar
येज़मींबाम-ए-फ़लकहोगएजिनकबसेअलग
चाँदभीरहनेलगाक्याख़बरअबकैसेअलग
रोज़दीवारलगीदेखरहाहरघरमें
ब्याहहोतेहीमियाँरहनेलगेसबसेेअलग
आनाजानावोरखेयारखेमर्ज़ीहै
हमनेथोड़ीकहाख़ुदरहनेलगाहमसेेअलग
जान-ए-तनक्यासभीकुछउसकेलिएहैमेरा
क्याहुआभाईअगररहनेलगामुझसेेअलग
हुएहैंअहल-ए-ज़मींमेंसोसुख़न-वरतोबहुत
पर"प्रशांत"आपकाए'जाज़-ए-बयाँसबसेेअलग
  - Prashant Kumar
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