ya chashm-e-nam se aaj samundar chura ke la | या चश्म-ए-नम से आज समुंदर चुरा के ला

  - Prashant Kumar
याचश्म-ए-नमसेआजसमुंदरचुराकेला
याफिरकिसीफ़क़ीरकीबोतलउठाकेला
चंदाकेहाथपाँवपेमेंहदीलगाकेला
सूरजकोआजरातकीदुल्हनबनाकेला
पागलहैमौतदेखमिरेइंतिज़ारमें
जल्दीसेज़िंदगीकोतूघरसेबुलाकेला
मेरेलिएहैइश्क़तिरेदिलमेंबे-पनाह
तोफिरमिरेख़यालमेंख़ुदकोबुलाकेला
कैसेकरूँँयक़ीनमोहब्बतकाहैख़ुदा
चलपत्थरोंमेंइश्क़कातूफ़ानउठाकेला
नज़रेंबहुतबुरीहैंज़मानेकीलगजाएँ
दुल्हनकोमेरेहाथकाघूँघटउड़ाकेला
सदियाँगुज़रगईंअरेनाचेहुएमुझे
जातोकिसीअमीरकीपायलचुराकेला
जोभीकहूँगाइश्क़मेंसबकुछकरेगाफिर
सोतीहुईचुड़ैलकीअँगियाचुराकेला
ऐसेनहींबिकेंगेग़म-ए-जाँ-गज़ासनम
इनकीबसएकबारतूक़ीमतबढ़ाकेला
  - Prashant Kumar
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