adbhar kabhi jaan bech dete hain | वतन-फ़रोश कभी जान बेच देते हैं

  - Prashant Kumar
वतन-फ़रोशकभीजानबेचदेतेहैं
कभीकफ़नकाहीसामानबेचदेतेहैं
ग़रीबपर्वपेभूखेसोएँइसलिएतो
ख़ुदअपनेआपकोभगवानबेचदेतेहैं
मैंक़र्ज़अदाकरूँँकिसकिसकायेपरिंदेतो
मिरीदवामेंशबिस्तानबेचदेतेहैं
वतन-परस्तअगरजेबगर्महोजाए
हरएकजंगकाऐलानबेचदेतेहैं
कभी-कभीहमेंभीजानेक्याहोजाताहै
तुम्हारीयादमेंदालानबेचदेतेहैं
मुझेबचानेकेचक्करमेंक्यानहींकरते
वोमेरेनामसेइंसानबेचदेतेहैं
  - Prashant Kumar
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