soj kii raat mira dard badhaati jaa.e | सोज की रात मिरा दर्द बढ़ाती जाए

  - Prashant Kumar
सोजकीरातमिरादर्दबढ़ातीजाए
माँकिरोरोकेकलेजेसेलगातीजाए
मैंफ़क़ीरीमेंकिहरज़ख़्मलिएबैठाहूँ
औरयेदुनियाकिबसहाथमिलातीजाए
हरतरफ़बरपाहुआहैकोईजश्न-ए-मक़्तल
नाचतेगातेक़ज़ामुझकोबुलातीजाए
ख़ुदकोनासेहहीबतातीथीहसीनालेकिन
अबसर-ए-आमयहीलाशबिछातीजाए
वास्ताकुछभीनहींहैमिराउससेेफिरभी
जबभीरस्तेमेंमिलेहाथहिलातीजाए
मैंकिमेहमानहूँदोचारदिनोंकाफिरभी
मेरेऊपरकिवोतोजानलुटातीजाए
गिनतीकरतीहैभिकारीकीसफ़ोंमेंमेरी
अव्वलअव्वलजोमुझेअपनाबतातीजाए
झोपड़ाहैहीलत्तेहैंआब-ओ-दाना
इकहसींफिरभीमुझेदिलमेंबसातीजाए
सदाबदनामहीकरनेपेतुलीरहतीहै
कनेसेगुज़रेमिरेहाथलगातीजाए
  - Prashant Kumar
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