phool sa jism hai mutthi men simat jaayega | फूल सा जिस्म है मुट्ठी में सिमट जाएगा

  - Prashant Kumar
फूलसाजिस्महैमुट्ठीमेंसिमटजाएगा
ऐसेमतदेखमुझेजल्दनिपटजाएगा
देखनेवालातुझेदेखतारहजाएगा
बारिशोंमेंतूअगरऐसेरपटजाएगा
आँखसेपाँवतलकसाँपहैवोज़हरीला
छेड़नामतकोईसीनेसेलिपटजाएगा
छोड़अरेइसकीज़रूरतनहींहैरहनेदे
वोज़रासाहीहैआँखोंमेंनिपटजाएगा
मेरीमानोकोईभीपासमेंमतजानावो
रातसेचिढ़गयाहैतुमपेझपटजाएगा
  - Prashant Kumar
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