KHaak aalam kii jabeen pe laga ke chalte hain | ख़ाक 'आलम की जबीं पे लगा के चलते हैं

  - Prashant Kumar
ख़ाक'आलमकीजबींपेलगाकेचलतेहैं
पूरीदुनियाकोहीहमघरबताकेचलतेहैं
चाहेहिंदूहोमुसलमानहोयाईसाई
ख़ूनमेंख़ूनसभीकामिलाकेचलतेहैं
क़ौममज़हबयेतिरेकामकेहोंगेशायद
हमतोइंसानगलेसेलगाकेचलतेहैं
एकहीसबकीज़मींएकहीहैसबकामुल्क
जोजोमिलताहैसबकयेसिखाकेचलतेहैं
दार-उल-'इल्मयेसंसारहैऔरहमशागिर्द
छोटेबच्चोंकोअभीसेबताकेचलतेहैं
उँगलियाँक़ौमकीहमपेउठेंआइंदा
हमतोहरख़ूनकोअपनाबताकेचलतेहैं
हमदबीजोतरहेहैंतिरीक्यूँँझुकजाएँ
हमज़मानेसेनिगाहेंमिलाकेचलतेहैं
  - Prashant Kumar
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