aankh hi aankh men usloob badal jaate hain | आँख ही आँख में उस्लूब बदल जाते हैं

  - Prashant Kumar
आँखहीआँखमेंउस्लूबबदलजातेहैं
एकहीरातमेंमहबूबबदलजातेहैं
पाठहक़कावोज़मानेकोपढ़ातेफिरते
साइकिलकीमिरीट्यूबबदलजातेहैं
हाँवहीलोगबदलतेहैंठिकानाअक्सर
सरसेजोपाँवतलकख़ूबबदलजातेहैं
ख़ुदकोजोलोगमोहब्बतकाख़ुदाकहतेहैं
अगलेदिनउनकेहीमंसूबबदलजातेहैं
सालोंलगजातेथेदीदारमेंहीपहलेअब
हाथकेहाथकिमहबूबबदलजातेहैं
यूँँहीबसगर्दिश-ए-अय्यामसेयादआयाहै
क्यूँँ'प्रशांत'आजकेमक्तूबबदलजातेहैं
  - Prashant Kumar
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