sochta hooñ abhii munsif ko uchhaala de doon | सोचता हूँ अभी मुंसिफ़ को उछाला दे दूँ

  - Prashant Kumar
सोचताहूँअभीमुंसिफ़कोउछालादेदूँ
छीनकरउसकीफ़क़ीरोंकोदुशालादेदूँ
लूटकरतेराफ़क़ीरोंकोख़ज़ानादेदूँ
औरभीक्या-क्याहैसर-ए-बज़्महवालादेदूँ
ख़ुदामैंहूँफटेहालबताफिरकरूँँक्या
छीनकरतेराफ़क़ीरोंकोनिवालादेदूँ
झोपड़ाछोड़अगरकोईअँधेरेमेंहो
तोमैंतोख़ुदकोजलाकरकेउजालादेदूँ
फ़र्श-ए-गुलताज-महलयेतोपुरानेहैंसब
मोहब्बतकीनिशानीमेंशिवालादेदूँ
वोख़रीदेगानहींकुछभीदुकान-ए-दिलसे
चलकिसीऔरकोसाँसोंकाक़बालादेदूँ
  - Prashant Kumar
Share

profile-whatsappprofile-twitterprofile-fbprofile-copy