vo shaKHs har tarah se manaata raha mujhe | वो शख़्स हर तरह से मनाता रहा मुझे

  - Prashant Kumar
वोशख़्सहरतरहसेमनातारहामुझे
मेरीनिशानियाँभीदिखातारहामुझे
देखानहींमुकरकेमगरएकबारभी
रोरोकेखिड़कियोंसेबुलातारहामुझे
इसमेंहवाकादोषनहींहैमिरीख़ता
मेराचराग़ख़ुदहीबुझातारहामुझे
हरबारअच्छीकिस्मकामैंबीजबनगया
मिट्टीमेंकितनीबारमिलातारहामुझे
नज़रोंसेदूरहोगयाफिरउसकेबादभी
एहसासअपनेपनकाकरातारहामुझे
तबबातऔरथीमगरअबबातऔरहै
जबतकरहावोअपनाबतातारहामुझे
मैंकबजहाँमेंआयामुझेख़ुदनहींपता
जबतकरहावोयाददिलातारहामुझे
याँकौनक्याहैयारमुझेख़ुदनहींपता
जबतकरहावोदुनियादिखातारहामुझे
मजबूतआदमीहूँमैंफिसलाकभीनहीं
अपनीअदाओंसेवोलुभातारहामुझे
  - Prashant Kumar
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