sabhi ko zindagi ke rang dikhl | सभी को ज़िंदगी के रंग दिखलाना ज़रूरी है

  - Prashant Kumar
सभीकोज़िंदगीकेरंगदिखलानाज़रूरीहै
सोमेरेनामसेपहचानबनवानाज़रूरीहै
किसीकाभीसुराग़ऐसेमिलेगाहीनहींतुमको
अरेइसबारहाकिमकोभीउठवानाज़रूरीहै
सुनाहैख़ूबचीनीसेभीमीठेहोंटहैंउनके
तोफिरबोसाहमेंभीयारदिलवानाज़रूरीहै
हमेशाताड़तेरहतेहैंघरमेंलोगगलियोंसे
किवाड़ोंकोअरेऐसेमेंचढ़वानाज़रूरीहै
इधरमैंचलनहींसकताउधररोनेलगेहैंवो
गुलअहमरकिसीकेहाथभिजवानाज़रूरीहै
तुझेकोईउठाकरलेजाएडरलगारहता
तिरीचौखटपेदरवाज़ाभीलगवानाज़रूरीहै
मिरेदीदारकीचाहतमेंहीबीमारहोतेहैं
उन्हेंचेहरासुनोऐसेमेंदिखलानाज़रूरीहै
तुम्हाराहुस्नमेराफ़नजबइतनामिलताजुलताहै
तोफिरग़ज़लोंमेंक्यानज़्मोंमेंभीज़िक्रआनाज़रूरीहै
  - Prashant Kumar
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