rahne laga hooñ jab se tumhaari girift men | रहने लगा हूँ जब से तुम्हारी गिरफ़्त में

  - Prashant Kumar
रहनेलगाहूँजबसेतुम्हारीगिरफ़्तमें
आयानहींहैकुछभीनज़रतबसेदश्तमें
खोयानहींहूँफिरसेज़रादेखध्यानसे
रक्खाहुआमिलूँगाकहींचीज़-बस्तमें
ऐसेउछलरहेहैंमिराहालदेखकर
जैसेलगादियाहोकोईबंद-ओ-बस्तमें
इतनाभीमतरुलाउसेअबरहमकरख़ुदा
तूभीकिसीकीआएगाइकदिनगिरफ़्तमें
इतनाभीअबगुमानकरजीतपरतिरे
बच्चोंकाथाइलाजमिरीहीशिकस्तमें
सबनेमुझेनिकालदियाहैदयारसे
ताइरकेसाथरहनेलगाहूँमैंदश्तमें
इतनाभीअबघमंडकरअपनीजीतपर
रोटीछुपीथीतेरीमिरीहीशिकस्तमें
  - Prashant Kumar
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