raat ho rahi din nikal raha | रात हो रही दिन निकल रहा

  - Prashant Kumar
रातहोरहीदिननिकलरहा
चाँदक्यूँँमिरेसाथचलरहा
सबउदासहैंदीदकोतिरे
आफ़ताबभीहाथमलरहा
तुमबदलरहेरंगदेखलो
आस्तीनसेक्यानिकलरहा
रहमकरख़ुदाबद-नसीबपर
दर्दमेंमिरालालपलरहा
टूटकरकोईजुड़नहींसका
येउसूलअबक्यूँँबदलरहा
औरभीबहुतलोगथेमगर
मो'जिज़ामिराबे-बदलरहा
वक़्तहैअभीबातमानले
रंगमेंमिरेक्यूँँतूढलरहा
  - Prashant Kumar
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