phool maktub ke saath men bhejna ye usool-e-mohabbat puraana hua | फूल मक्तूब के साथ में भेजना ये उसूल-ए-मोहब्बत पुराना हुआ

  - Prashant Kumar
फूलमक्तूबकेसाथमेंभेजनायेउसूल-ए-मोहब्बतपुरानाहुआ
कामसबहाथकेहाथहीहोरहेइसक़दरतेज़अबकाज़मानाहुआ
वोहमेंदेखकरमुस्कुरानेलगेइश्क़काफिरशुरूसेफ़सानाहुआ
प्यारसेइकनज़रक्याइधरडालदीहरकोईआपहीकादिवानाहुआ
एकतस्वीरसेकामचलतारहावोतोबचपनथाकबकागुज़रभीगया
अबतोजितनीहैंबंद-ए-क़बाखोलदोहमकोदेखेहुएइकज़मानाहुआ
वोकहींबैठतेहमकहींबैठतेकौनकहताहैउनसेेमोहब्बतहैये
हरदफ़ाफेरलीहैनज़रदेखकरयेलगानाकोईदिललगानाहुआ
बसहमेंछोड़करपीरहेहैंसभीहुस्नकेदरमियाँहुस्नकीबाँहोंमें
एकहमहीअलगदिखतेबैठेहुएयेबुलानाकहाँकाबुलानाहुआ
लोगइसदौरकेजामउसदौरकाफिरकिसीपरअसरबोलोकैसेकरे
खोलकरआँखतबजामउठायाकरोदेखतोलोबहुतहीपुरानाहुआ
रास्तेमेंकहींभीबहकजाएँतोसाक़ियाथामलेनाहमेंआजकल
औरगिरतेहुएकोगिरातेहैंसबज़ालिमोंकाभीज़ालिमज़मानाहुआ
  - Prashant Kumar
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