man mutaabiq kisi ko kaam nahin milta hai | मन मुताबिक़ किसी को काम नहीं मिलता है

  - Prashant Kumar
मनमुताबिक़किसीकोकामनहींमिलताहै
मिलभीजाएतोफिरआरामनहींमिलताहै
घूमकरसाराजहाँदेखलियामेरेसिवा
कोई'आशिक़मुझेबदनामनहींमिलताहै
छोटेबनकेरहोबर्दाश्तभीकरनासीखो
ऐसीबातोंसेकभीनामनहींमिलताहै
बातजिससेेभीकरोसाफ़करोसीधीकरो
उल्टीबातोंसेकहींकामनहींमिलताहै
क्याकरूँँवक़्तपेमैंरोज़दवालेताहूँ
परमिरेदर्दमेंआरामनहींमिलताहै
सूर्यछिपतेहीसभीघरपेचलेजातेहैं
इकपरिंदाभीसर-ए-शामनहींमिलताहै
  - Prashant Kumar
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