neqi ke raaste ki badi se sane lage | नेक़ी के रास्ते कि बदी से सने लगे

  - Prashant Kumar
नेक़ीकेरास्तेकिबदीसेसनेलगे
जबसेदलील-बाज़लगानेगलेलगे
ख़ालीक़लमकोजेबपेकलक्यालगादिया
अनपढ़गँवारलोगोंकेसीनेतनेलगे
कोईख़तानहींथीमिरीजानबूझकर
वोआएऔरझोपड़ेकोफूँकनेलगे
बरसाततोकहींभीनहींदूरदूरतक
फिरक्यूँँतिरेदयारसभीसूखनेलगे
घिनरहीथीशायदउनेहालदेखकर
करकेनिगाहमेरीतरफ़थूकनेलगे
ऐसानहींकिशख़्सकोईजानतानहीं
सबजानतेहैंफिरभीमुझेघूरनेलगे
  - Prashant Kumar
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