na dil laga kisoo se tu na zindagi KHaraab kar | न दिल लगा किसू से तू न ज़िंदगी ख़राब कर

  - Prashant Kumar
दिललगाकिसूसेतूज़िंदगीख़राबकर
हफ़ीज़बनकेवादियोंकेख़ारकोगुलाबकर
येउँगलियाँयेपुतलियाँयेबस्तियाँयेहस्तियाँ
भलीभलीसीलगरहींइन्हेंअभीख़राबकर
उधारउधारछोड़यारतेरीहीदुकानहै
कहादिलभीलेलियोपुरानातोहिसाबकर
अगरनहींबुझीकिसीभीमय-कदेमेंप्यासतो
उठामिरागिलासआँसुओंकोफिरशराबकर
घिसा-पिटासवालहैमुहब्बतोंकाइश्क़का
इसेकिसीसेपूछमतइसेतूख़ुदजवाबकर
  - Prashant Kumar
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