mujhe dar ho kyun kisi ka mire saath men KHuda hai | मुझे डर हो क्यूँँ किसी का मिरे साथ में ख़ुदा है

  - Prashant Kumar
मुझेडरहोक्यूँँकिसीकामिरेसाथमेंख़ुदाहै
वोरफ़ीक़बनकेमेरासर-ए-आमगयाहै
मैंयक़ीनकैसेकरलूँतिरीबातपरख़ुदाहै
सुनाईदेरहाहैदिखाईदेरहाहै
मुझेऐसालगरहाहैकिहुईइधरक़यामत
तिरेबाग़बाँसेगुलचींमिराफूललापताहै
अरेदेखलेनाहमदममैंवहींखड़ामिलूँगा
तिरेदिलकेरास्तेसेमिरारास्ताजुड़ाहै
किसीख़ुश-नसीबदिलकोमिरीयादरहीहै
सोशब-ए-विसालताईंवोतोबौखलागयाहै
तोरंजिशेंकिसीसेहीदोस्तीहैफिरभी
मिरामुंसिफ़ोंकोकोईकिसुराग़देगयाहै
  - Prashant Kumar
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