मुझे बाहों में खिलाते हैं तिरे शहर के लोग

  - Prashant Kumar
मुझेबाहोंमेंखिलातेहैंतिरेशहरकेलोग
औरपागलभीबतातेहैंतिरेशहरकेलोग
किमुझेअहल-ए-वतनअहल-ए-वराकहतेहैं
उँगलियाँफिरभीउठातेहैंतिरेशहरकेलोग
रोज़-ए-ख़ुशकीतोकोईबातनहींहैजानाँ
शब-ए-ग़ममेंभीसतातेहैंतिरेशहरकेलोग
हाँसनमजबभीगुज़रताहूँतिरीगलियोंसे
तिरादीवानाबतातेहैंतिरेशहरकेलोग
जानसेज़्यादामुझेप्यारभीकरतेहैंऔर
खरीखोटीभीसुनातेहैंतिरेशहरकेलोग
  - Prashant Kumar
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