mujhe apna banaane ki qasam to roz khaate hain | मुझे अपना बनाने की क़सम तो रोज़ खाते हैं

  - Prashant Kumar
मुझेअपनाबनानेकीक़समतोरोज़खातेहैं
मगरवोसामनेमेरेकहाँकुछबोलपातेहैं
कभीभीबनबिगड़जाएकिसीसेरास्तेमेंतो
खरीउसकोसुनातेहैंमुझेआँखेंदिखातेहैं
कभीहोनेनहींदेतेमुझेवोआँखसेओझल
अगरछतपरभीजाताहूँतोमेरेसाथजातेहैं
कभीमंदिरकभीमस्जिदकभीगिरजामेंजातेहैं
वोहरदरपरमिरेहीनामकासदक़ाचढ़ातेहैं
अगरमहबूबकीगलियोंमेंजिसदिनमैंनहींजाऊँ
तोफिरख़ल्वतमेंजाकरकेबहुतआँसूबहातेहैं
  - Prashant Kumar
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