lazzat-e-kaam-o-dahan men tire chhar hote tak | लज़्ज़त-ए-काम-ओ-दहन में तिरे छर होते तक

  - Prashant Kumar
लज़्ज़त-ए-काम-ओ-दहनमेंतिरेछरहोतेतक
ख़ूँबदलजाएतिरालख़्त-ए-जिगरहोतेतक
हुस्नवालोंकोमोहब्बतकीख़बरजबहोगी
सूखजाएगाजिगरजान-ओ-जिगरहोतेतक
चाँदसूरजहूँमुख़य्यरहूँख़ुदासायकता
कौनआएगाइधरदेखूँअमरहोतेतक
राहसेदर्द-फ़ज़ाऐसेगुज़ारेकोई
आँखलगजाएमिरीउसकोख़बरहोतेतक
तूअठारहकीहुईभीनहींहैऔरतबतक
चलेजाएँगेमोहब्बतकाअसरहोतेतक
क़ैदकरदिलमेंकिबर्दाश्तनहींहोताअब
अरेमरजाएँगेहमपेश-ए-नज़रहोतेतक
यारकैसेकरेंमुजरिमकोकिमुजरिमसाबित
मरजाएँकहींमुंसिफ़कोख़बरहोतेतक
चश्म-ए-बातिनहैअगरतोमैंभीसंग-ए-मक़्तल
बुझहीजाएगीनज़रमुझपेअसरहोतेतक
जिसेआनाहैलगेहाथअभीजाए
हमरहेंगेहीनहींकलकीसहरहोतेतक
मतदिखानाफ़सँभालेसेसँभलेगाफिर
खुलहीजाएगाकमरबंदअसरहोतेतक
  - Prashant Kumar
Share

profile-whatsappprofile-twitterprofile-fbprofile-copy