laangh kar gaav kii deewaar nikal jaata hai | लाँघ कर गाँव की दीवार निकल जाता है

  - Prashant Kumar
लाँघकरगाँवकीदीवारनिकलजाताहै
हरदफ़ाबचकेमिरायारनिकलजाताहै
बोलताहीनहींहैमुझसेेकहींमिलजाऊँ
अबतोचुपचापहीबाज़ारनिकलजाताहै
'उम्र-ए-रफ़्ताहीगईछेड़केपंचांगमिरा
फ़िक्रमेंखेलकाइतवारनिकलजाताहै
बे-वफ़ाहैयेज़मानापताहैसबकोपर
जबदलीलेंहोंवफ़ादारनिकलजाताहै
जान-ए-मनतेरीपहुँचतोबड़ीऊपरतकहै
बा-मुरव्वतभीगुनहगारनिकलजाताहै
देखताभीनहींहैकोईज़रासाभीइधर
पाससेदिलकाख़रीदारनिकलजाताहै
हाथअगरमारदेंपत्थरहोयालोहाहोफिर
इकदफ़ेमेंहीकिआकारनिकलजाताहै
  - Prashant Kumar
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