kuchh aur nahin prem-kahaani men likha hai | कुछ और नहीं प्रेम-कहानी में लिखा है

  - Prashant Kumar
कुछऔरनहींप्रेम-कहानीमेंलिखाहै
बससूखाहुआफूलनिशानीमेंलिखाहै
लोगोंनेजोअहवालबुढ़ापेमेंलिखाथा
हमनेवोसमाचारजवानीमेंलिखाहै
इसदौरमेंभीबदलीनहींग़मकीकिताबें
लेदेखयहीहालपुरानीमेंलिखाहै
तेरेबिनअधूराथामोहब्बतकाफ़साना
मुश्किलसेबहुतप्रेम-कहानीमेंलिखाहै
बचपनकीमोहब्बतनेकभीहारमानी
मज़मूनयेअश्कोंकीरवानीमेंलिखाहै
  - Prashant Kumar
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