ख़ुशथाउसीमेंख़ार-ए-मुग़ीलाँदियागया
बेकारझोपड़ेमेंमिरेगुलखिलागया
अहल-ए-वराकीलिस्टमेंपहलेशुमारथा
कितनाशरीफ़आदमीख़ंजरचलागया
मुझसेेज़मींपरअहल-ए-सख़ावतनहींहुए
अहल-ए-वतनकेवास्तेजाँतकलुटागया
सोचाचलोसभीकोमोहब्बतसिखाएँअब
उल्टाजहाँहमेंहीबग़ावतसिखागया
उसपरनजानेकौनसीकलधुनसवारथी
आयाहरएकदिलसेमोहब्बतमिटागया
मेरेकटोर-दानमेंरोटीबचीथीएक
राज़ीख़ुशीसेवोभीसभीकोखिलागया
कहकरगुलाबलायाथाबीड़ीमज़ाक़में
ऊपरसेऔरहाथपरइकगुललगागया