kahii par meer ghalib to kahii gulzaar baithe hain | कहीं पर मीर, ग़ालिब तो कहीं गुलज़ार बैठे हैं

  - Prashant Kumar
कहींपरमीर,ग़ालिबतोकहींगुलज़ारबैठेहैं
मगरइक़बालअकेलेसबपेकरकेवारबैठेहैं
सभीयकतासुख़नजिनकेहुनरनायाबथाजिनका
हमारेलबपरउनइक़बालकेअश'आरबैठेहैं
तुम्हेंउस्तादकरनेकीबहुतथीआरज़ूदिलकी
अभीतकहमक़लमकॉपीलिएतैयारबैठेहैं
तुम्हेंउस्तादकरकेफिरचरणछूनेकीइच्छाथी
इसीइकआसमेंहमअबभीसरहदपारबैठेहैं
वही'अल्लाम-उल-गै़बऔर'अल्लामाहैंदुनियाके
क़लमकीनोकपरउनकीसभीफ़नकारबैठेहैं
  - Prashant Kumar
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