qabaayein bechne waale juraab maangte hain | क़बाएँ बेचने वाले जुराब माँगते हैं

  - Prashant Kumar
क़बाएँबेचनेवालेजुराबमाँगतेहैं
मय-ए-फ़रोशअबउनसेेगुलाबमाँगतेहैं
कमर-ख़मीदातोउस्तादबोलकरख़ुदको
सुनाहैउनसेेगणितकीकिताबमाँगतेहैं
शबाबियातसेख़ालीमिसालदेंतोक्या
किहुस्नवालेतकउनसेेशबाबमाँगतेहैं
अभी-अभीतोनवाज़ेहैंजानदेकरसब
सिकंदरऔरदुबाराख़िताबमाँगतेहैं
सुनाहैउनपेमय-ए-कोहनालुटातेहैं
फिरउसकेबादमहाजनहिसाबमाँगतेहैं
सुनाहैज़ुल्फ़कीतासीरऐसीहैउनकी
किसर्दियोंमेंभीसबआब-आबमाँगतेहैं
निगाह-ए-दोस्तकामेरेकमालऐसाहै
किसाधू-संतभीउनसेेशराबमाँगतेहैं
किदूर-दूरतलकभीकहींथाऐसा
तुम्हींकोदेखकेसबआफ़ताबमाँगतेहैं
वोकाम-धाममेंख़तलिखनाभूलजाएँतो
उधरकेनामा-बरउनसेेजवाबमाँगतेहैं
गलीकेबच्चेउन्हेंदेखलेंतोशर्माकर
दबाकेदाँतमेंउँगलीकबाबमाँगतेहैं
  - Prashant Kumar
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