jo maulvi ne kaha tha ik din vahii mukammal bayaan hooñ main | जो मौलवी ने कहा था इक दिन वही मुकम्मल बयान हूँ मैं

  - Prashant Kumar
जोमौलवीनेकहाथाइकदिनवहीमुकम्मलबयानहूँमैं
किक़ुर'आ-ए-फ़ालमेंहुआतयख़ुदाकाकोईनिशानहूँमैं
ख़ुदाकाबंदानिराशक्यूँँहैबतातोइतनाउदासक्यूँँहै
अगरख़ुदाकामुरीदहैतूतोतेरेघरकीअज़ानहूँमैं
तूमुंसिफ़ोंसेमिलाहुआहैतोकामइतनासाऔरकरियो
उन्हेंभीजाकरबताहीदेनाख़ुदीमेंसाराजहानहूँमैं
निगाहसेमतउतारदेनादूरकरियोकभूदिलोंसे
सभीलबोंपरसजाकेरखियोतुम्हारीउर्दूज़बानहूँमैं
बुलारहीहैंमुझेवोहूरेंहुआहैइल्हामआशिक़ीको
किसूनेउनकोबतादियाहैअजरअमरऔरजवानहूँमैं
तिरीनज़रकीसुख़न-वरीमें'अजबक़यामतदिखाईदीहै
कितौंसमेंतूगिरादेनाग़ज़लकाकच्चामकानहूँमैं
कभूख़ुदाकोमिटारहाहूँकभूख़ुदाकोबनारहाहूँ
अरेकिसूकोभनकनहींहैजहाँमेंइतनामहानहूँमैं
कभूसितमगरबतारहाहैकभूतो'आदिलबतारहाहै
मुझेपहाड़ेपढ़ारहाहैकिआँखदेखाबयानहूँमैं
पूछनातुमकिसूसेकुछभीशर्मकरनातरहतरहकी
जोदिलकरेवोउठाकेखानातुम्हारीहीतोदुकानहूँमैं
  - Prashant Kumar
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