jab dekhne ko aayen pahra bitha hua ho | जब देखने को आएँ पहरा बिठा हुआ हो

  - Prashant Kumar
जबदेखनेकोआएँपहराबिठाहुआहो
होंफूलसीक़बाएँचेहराखिलाहुआहो
ज़ोहरा-जमालअबकीइतनाख़यालरखना
दीदारहमकरेंतोपर्दाउठाहुआहो
मेंहदीलगीहुईहोगर्दनमेंहोहमाइल
ऊपरकमरयाफशपरइकतिलबनाहुआहो
येरंगरूपख़ुशबूहूरोंसेमिलरहेहों
कानोंकीबालियोंपरक़ातिललिखाहुआहो
आँखोंमेंदिखरहाहोग़र्क़ाबकानज़ारा
रुख़सारपरबड़ासाइकदिलबनाहुआहो
साराजहानयूँँहीनख़रेउठारहाहो
ख़ालिक़भीख़ुदपरस्तीतेरीलगाहुआहो
झुमकेमटकमटककरगर्दनकोचूमतेहों
दाँतोंमेंमोतियोंकेसोनामढ़ाहुआहो
बंद-ए-क़बाखुलेख़ुदगिरजाएकोईबिजली
कमज़ोरहरक़बामेंटाँकालगाहुआहो
तन-मनसेलगरहीहोदेवीनिज़ाम-ए-ज़रकी
रुख़सारपरतुम्हारेसलमालिखाहुआहो
होंटोंपेसिसकियाँहोंमुझकोहीदेखतीहो
फूलोंसेपाँवमेंजबकाँटाघुसाहुआहो
ऐसेलुढ़करहाहैवोबद-हवासेहोकर
सारीशराबजैसेख़ुदहीपियाहुआहो
  - Prashant Kumar
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