ja rahe hain log phir bhi aazma kar | जा रहे हैं लोग फिर भी आज़मा कर

  - Prashant Kumar
जारहेहैंलोगफिरभीआज़माकर
रखदियाहैआसमाँहमनेहिलाकर
जारहेसबआगदुनियामेंलगाकर
रहेहमआगदुनियाकीबुझाकर
मौतकोतकहैग़ुरूरअपनीअदापर
जानरखतेहैंहथेलीपरसजाकर
लोगलातेकश्तियाँतूफ़ानमेंहम
लाएहैंतूफ़ानकश्तीमेंउठाकर
हँसरहेहोयारतुमयेतोबताओ
क्यामिलेगाझोपड़ामेराजलाकर
तिश्नगीपरउँगलियाँउठनेलगीथीं
रखदियाफिरतोसमुंदरहीसुखाकर
जिसहवासेबुझगएसबकेचराग़ाँ
उसहवासेलाएहैंदीपकजलाकर
जबकभीभीहमनिकलतेहैंसफ़रपर
गर्दिशेंरखतेहैंमुट्ठीमेंदबाकर
  - Prashant Kumar
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