ik roz aa.e baam-e-falak par bina bul | इक रोज़ आए बाम-ए-फ़लक पर बिना बुलाए

  - Prashant Kumar
इकरोज़आएबाम-ए-फ़लकपरबिनाबुलाए
क़िस्मतसँवरहीजाएमुझेयूँँगलेलगाए
कैसेयक़ीनकरलूँमोहब्बतमुझीसेहै
उससेेकहोकिदिलमेंवोतस्वीरभीदिखाए
कैसेजाँ-निसारकरेंतुझपेदिलरुबा
दिनरातजबदिखाएतोज़ल्वावहीदिखाए
कुछहोगयातुझेतोबताक्याकरेंगेहम
जायाकरतूऐसेकहींभीबिनाबताए
जितनानशालगाकेतुझेहोताहैहमें
चौबीसघण्टेरहताहैवोभीबिनालगाए
  - Prashant Kumar
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