chhodkar sheher-e-ghareebaam ko chala jaaunga | छोड़कर शहर-ए-ग़रीबाँ को चला जाऊँगा

  - Prashant Kumar
छोड़करशहर-ए-ग़रीबाँकोचलाजाऊँगा
एकदिनक़र्ज़ज़मानेकोचुकाजाऊँगा
मेरीआँखोंमेंबसाहैकोईतूफ़ान-ए-नूह
रोऊँगातोदर-ओ-दीवारहिलाजाऊँगा
तूबराबरमेंहीरहतामिरेचिंतामतकर
मैंजलूँगातोतुझेभीतोजलाजाऊँगा
एकदूजेसेसगेभाईख़फ़ाहैंतोक्या
एकदिनदेखनामैंसबकोमिलाजाऊँगा
सबमिरेसाथमेंकरतेहैंबुराकरनेदो
मैंज़मानेकामगरकरकेभलाजाऊँगा
  - Prashant Kumar
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