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Adarsh Akshar
sukh dukh men ek dooje ke saath hain sadaa ham
sukh dukh men ek dooje ke saath hain sadaa ham | सुख दुख में एक दूजे के साथ हैं सदा हम
- Adarsh Akshar
सुख
दुख
में
एक
दूजे
के
साथ
हैं
सदा
हम
क़ाएम
रहे
हमेशा
ये
दोस्ती
हमारी
- Adarsh Akshar
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मिलने
की
तरह
मुझ
सेे
वो
पल
भर
नहीं
मिलता
दिल
उस
से
मिला
जिस
सेे
मुक़द्दर
नहीं
मिलता
Naseer Turabi
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हुस्न
सब
को
ख़ुदा
नहीं
देता
हर
किसी
की
नज़र
नहीं
होती
Ibn E Insha
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दोनों
बिलकुल
झूठे
थे
दोनों
अब
तक
ज़िंदा
हैं
Sabeen Saif
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उस
ने
फेंका
मुझ
पे
पत्थर
और
मैं
पानी
की
तरह
और
ऊँचा
और
ऊँचा
और
ऊँचा
हो
गया
Kunwar Bechain
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अदाकार
के
कुछ
भी
बस
का
नहीं
है
मोहब्बत
है
ये
कोई
ड्रामा
नहीं
है
जिसे
तेरी
आँखें
बताती
हैं
रस्ता
वो
राही
कहीं
भी
पहुँचता
नहीं
है
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Zubair Ali Tabish
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कई
शे'र
पढ़
कर
है
ये
बात
जानी
कोई
शे'र
उसके
मुक़ाबिल
नहीं
है
Alankrat Srivastava
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ऐ
मुझ
को
फ़रेब
देने
वाले
मैं
तुझ
पे
यक़ीन
कर
चुका
हूँ
Athar Nafees
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इसी
ख़्वाब
में
ज़ाया'
किया
'ईद
को
हर
दम
कभी
बोले
वो
सीने
से
लगकर
मुबारक
हो
Harsh saxena
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दिल
से
साबित
करो
कि
ज़िंदा
हो
साँस
लेना
कोई
सुबूत
नहीं
Fahmi Badayuni
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है
अब
भी
बिस्तर-ए-जाँ
पर
तिरे
बदन
की
शिकन
मैं
ख़ुद
ही
मिटने
लगा
हूँ
उसे
मिटाते
हुए
Azhar Iqbal
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चेहरे
पे
है
ख़ुशी
नहीं
ये
बात
अब
नई
नहीं
हूँ
जानता
उसे
भले
पर
उस
सेेे
दोस्ती
नहीं
तू
जितना
सोचता
है
यार
वो
उतनी
भी
बुरी
नहीं
है
कौन
ऐसा
दुनिया
में
जो
दुनिया
से
दुखी
नहीं
कोशिश
बहुत
की
दिल
से
पर
घर
वालों
से
बनी
नहीं
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Adarsh Akshar
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बहुत
कुछ
करना
था
इस
ज़िंदगी
में
मगर
बस
रह
गए
हम
आशिक़ी
में
Adarsh Akshar
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हम
बच्चों
के
रहबर
पापा
मिलते
सब
सेे
हँसकर
पापा
अच्छे
और
ग़लत
का
सबको
समझाते
थे
अंतर
पापा
पाँव
पसारो
चादर
जितनी
कहते
थे
ये
अक्सर
पापा
चार
बजे
ही
उठ
जाते
थे
खटते
थे
फिर
दिनभर
पापा
बच्चों
से
छिप
कर
रोते
थे
खाते
जब
जब
ठोकर
पापा
कपड़ों
के
शौक़ीन
बहुत
थे
सज
के
जाते
दफ़्तर
पापा
सख़्त
भले
हों
बाहर
लेकिन
नर्म
मुलाएम
अंदर
पापा
घर
का
सब
बोझ
उठाते
थे
थे
काफ़ी
ताक़तवर
पापा
संकट
के
सारे
बादल
को
कर
देते
छू
मंतर
पापा
सबके
सपने
पूरे
करते
सच
में
थे
जादूगर
पापा
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Adarsh Akshar
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जैसी
दुनिया
वैसा
बन
जितना
है
बस
उतना
बन
दरिया
बन
ही
जाएगा
लेकिन
पहले
क़तरा
बन
होते
होंगे
लोग
ग़ज़ल
तू
सुंदर
सा
दोहा
बन
पाना
जिसको
मुश्किल
हो
वैसा
ही
इक
सपना
बन
मंटो
का
अफ़साना
मैं
तू
साहिर
का
नग़मा
बन
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जिस
रस्ते
से
जाना
तय
है
उस
रस्ते
से
आना
तय
है
यारी
करके
जाना
हमने
यारी
में
जुर्माना
तय
है
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Adarsh Akshar
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