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Adarsh Akshar
ladki thii vo ambri sii
ladki thii vo ambri sii | लड़की थी वो अंबरी सी
- Adarsh Akshar
लड़की
थी
वो
अंबरी
सी
आँख
उसकी
मर्मरी
सी
तपता
जलता
जून
था
मैं
वो
थी
बिल्कुल
जनवरी
सी
बचपना
भीतर
छिपा
था
बात
करती
बावरी
सी
इक
नज़र
में
भा
गई
थी
वो
मुझे
तो
शा'इरी
सी
कोई
आख़िर
क्यूँ
सुनेगा
अब
कहानी
दुख
भरी
सी
- Adarsh Akshar
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दुनिया
कहती
थी
सरफिरा
लड़का
फिर
भी
तुम
पर
था
मर
मिटा
लड़का
तजरबे
बांटता
था
सब
सेे
ही
देता
था
सबको
मशवरा
लड़का
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इन
आँखों
ने
हर
मंज़र
याद
रखा
है
छूके
अंबर
अपना
घर
याद
रखा
है
शायद
उसका
चेहरा
मैं
भूल
चुका
हूँ
उसका
नंबर
अब
भी
पर
याद
रखा
है
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Adarsh Akshar
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आगे
आगे
ज़िंदगी
थी
पीछे
पीछे
ख़ुद-कुशी
थी
रंग
सारे
कह
रहे
हैं
सब
सेे
बेहतर
सादगी
थी
एक
छोटी
बात
उसके
सीधे
दिल
पर
जा
लगी
थी
साथ
देने
की
जगह
पर
दुनिया
मुझ
पर
हँस
रही
थी
बात
दिल
की
कहता
तब-तक
वो
किसी
की
हो
चुकी
थी
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Adarsh Akshar
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ये
दिल
उलझा
हुआ
तेरे
ख़यालों
में
नहीं
हो
सकता
है
इस
दिल
का
कुछ
भी
अब
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चोट
लगती
दिल
पे
जब
भी
टूट
जाता
आदमी
त्याग
के
सुख
चैन
दो
पैसे
कमाता
आदमी
Adarsh Akshar
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