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Adarsh Akshar
itni kyuuñ hai patthar duniya
itni kyuuñ hai patthar duniya | इतनी क्यूँ है पत्थर दुनिया
- Adarsh Akshar
इतनी
क्यूँ
है
पत्थर
दुनिया
हँसती
मुझ
पर
अक्सर
दुनिया
जिस
दिन
मन
में
प्रेम
भरोगे
हो
जाएगी
बेहतर
दुनिया
पल
पल
करतब
दिखलाएगी
अद्भुत
है
जादूगर
दुनिया
गुलशन
गुलशन
फूल
खिलाओ
वर्ना
होगी
बंजर
दुनिया
अंदर
उसके
थी
लेकिन
वो
ढूँढ़
रहा
था
बाहर
दुनिया
- Adarsh Akshar
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वक़्त
ही
कम
था
फ़ैसले
के
लिए
वर्ना
मैं
आता
मशवरे
के
लिए
तुम
को
अच्छे
लगे
तो
तुम
रख
लो
फूल
तोड़े
थे
बेचने
के
लिए
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Zia Mazkoor
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आदतन
उसके
लिए
फूल
ख़रीदे
वरना
नहीं
मालूम
वो
इस
बार
यहाँ
है
कि
नहीं
Abbas Tabish
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फूल
खिले
हैं
लिखा
हुआ
है
तोड़ो
मत
और
मचल
कर
जी
कहता
है
छोड़ो
मत
Ameeq Hanafi
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वो
सिर्फ़
फूल
नहीं
ख़ुद
में
ही
क्यारी
था
हमारा
शे'र
तुम्हारी
ग़ज़ल
पे
भारी
था
सब
उसके
चाहने
वाले
सलाम
करते
थे
मैं
उस
हसीन
का
सब
सेे
बड़ा
पुजारी
था
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Vishnu virat
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मुझको
बदन
नसीब
था
पर
रूह
के
बग़ैर
उसने
दिया
भी
फूल
तो
ख़ुशबू
निकाल
कर
Ankit Maurya
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वो
तो
ख़ुश-बू
है
हवाओं
में
बिखर
जाएगा
मसअला
फूल
का
है
फूल
किधर
जाएगा
Parveen Shakir
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सिगरटें
चाय
धुआँ
रात
गए
तक
बहसें
और
कोई
फूल
सा
आँचल
कहीं
नम
होता
है
Wali Aasi
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तुमने
जो
फूल
लेते
में
छू
लीं
हैं
उंगलियाँ
मेरे
बदन
से
आएगी
ख़ुशबू
गुलाब
की
Siddharth Saaz
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उम्र
गुज़री
है
माँजते
ख़ुद
को
साफ़
हैं
पर
चमक
नहीं
पाए
डाल
ने
फूल
की
तरह
पाला
ख़ार
थे
ना
महक
नहीं
पाए
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Vishal Bagh
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फूल
ही
फूल
याद
आते
हैं
आप
जब
जब
भी
मुस्कुराते
हैं
Sajid Premi
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आगे
आगे
ज़िंदगी
थी
पीछे
पीछे
ख़ुद-कुशी
थी
रंग
सारे
कह
रहे
हैं
सब
सेे
बेहतर
सादगी
थी
एक
छोटी
बात
उसके
सीधे
दिल
पर
जा
लगी
थी
साथ
देने
की
जगह
पर
दुनिया
मुझ
पर
हँस
रही
थी
बात
दिल
की
कहता
तब-तक
वो
किसी
की
हो
चुकी
थी
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कोई
भी
मुझ
सेा
कहाँ
है
जो
सभी
का
राज़दाँ
है
कोई
आख़िर
उसको
क्या
दे
पास
जिसके
आसमाँ
है
उम्र
ढ़लती
जा
रही
पर
दिल
अभी
भी
नौजवाँ
है
जीत
लोगे
दुनिया
सारी
लहजा
गर
शीरीं-ज़बाँ
है
इन
दिनों
हर
इक
गली
में
मिलती
नफ़रत
की
दुकाँ
है
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Adarsh Akshar
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चाहती
क्या
है
ज़िंदगी
हम
से
अब
नहीं
होती
नौकरी
हम
से
Adarsh Akshar
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तीरगी
हो
के
रौशनी
हो
के
बिक
गए
लोग
क़ीमती
हो
के
दोस्त
बनकर
जिन्हें
था
मिलना
अब
मिल
रहे
हैं
वो
अजनबी
हो
के
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Adarsh Akshar
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गर
दिल
में
इत्मीनान
है
तो
फिर
सफ़र
आसान
है
मैदान
में
रहना
डटे
जब
तक
बदन
में
जान
है
जब
से
गई
हो
दूर
तुम
दिल
की
गली
सुनसान
है
सच
में
बड़े
हो
ख़ुशनसीब
लब
पे
अगर
मुस्कान
है
आ
जाता
सबकी
बात
में
अक्षर
बहुत
नादान
है
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Adarsh Akshar
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