kab tak sahenge zulm rafeeqo-raqeeb ke | कब तक सहेंगे ज़ुल्म रफ़ीक़ो-रक़ीब के

  - Adam Gondvi
कबतकसहेंगेज़ुल्मरफ़ीक़ो-रक़ीबके
शोलोंमेंअबढलेंगेयेआँसूग़रीबके
इकहमहैंभुखमरीकेजहन्नुममेंजलरहे
इकआपहैंदुहरारहेक़िस्सेनसीबके
उतरीहैजबसेगांवमेंफ़ाक़ाकशीकीशाम
बेमानीहोकेरहगएरिश्तेक़रीबके
इकहाथमेंक़लमहैऔरइकहाथमेंक़ुदाल
बावस्ताहैंज़मीनसेसपनेअदीबके
  - Adam Gondvi
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