aaj apne aap ko poora badalna chahta hooñ | आज अपने आप को पूरा बदलना चाहता हूँ

  - Abhinav Srivastav
आजअपनेआपकोपूराबदलनाचाहताहूँ
इसपुरानीखालसेबाहरनिकलनाचाहताहूँ
एकमुद्दतसेतोरस्मोंकेक़फ़समेंक़ैदहूँमैं
तोड़करमैंयेसलाखेंअबउछलनाचाहताहूँ
लोगलेकरअपनीनफ़रतदूरमुझसेेहोगएहैं
मैंमोहब्बतअपनीलेकरफिरबहलनाचाहताहूँ
होशमेंजबतकरहामैंलड़खड़ानाहीहुआबस
आजमयमेंडूबकरमैंकुछसँभलनाचाहताहूँ
चारदिनथेज़िन्दगीमेंतीनसंजीदाकटेहैं
एकदिनआवारगीमेंमैंफिसलनाचाहताहूँ
  - Abhinav Srivastav
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