muqarrar din nahin to lamha-e-imkaan men aao | मुक़र्रर दिन नहीं तो लम्हा-ए-इमकान में आओ

  - Darpan
मुक़र्ररदिननहींतोलम्हा-ए-इमकानमेंआओ
अगरतुममिलनहींसकतेतोमेरेध्यानमेंआओ
कियेनाहोतुम्हेंअनजानकहकरदिलदफ़ाकरदे
तुम्हारेपासअबभीवक़्तहैपहचानमेंआओ
झिझकहै,खौफ़भीहै,रंजभीहैकुछख़ुशीभीहै
यहीहैवक़्तमिलनेका,इसीदौरानमेंआओ
बलाकीख़ूब-सूरतलगरहीहोआजतोजानाँ
मुझेइकबातकहनीहैतुम्हारेकानमेंआओ
महाज़ेइश्क़मेंजलवेदिखाऊँगातुम्हेंअपने
कभीकमरेमेंआओमाज़रतमैदानमेंआओ
हमारीजबज़रूरतथी,तुम्हारेजश्नमेंआए
तुम्हारीअबज़रूरतहै,हमारीशानमेंआओ
वगरनायूँँतोहरइकमुल्कमेंकुछरंगदेखोगे
इकट्ठेदेखनेहोसबतोहिंदुस्तानमेंआओ
  - Darpan
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