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Abbas Tabish
she'r likhne ka faayda kya haius se kehne ko ab raha kya hai
she'r likhne ka faayda kya haius se kehne ko ab raha kya hai | शे'र लिखने का फायदा क्या है
- Abbas Tabish
शे'र
लिखने
का
फायदा
क्या
है
उस
से
कहने
को
अब
रहा
क्या
है
पहले
से
तै
-शुदा
मोहब्बत
में
तू
बता
तेरा
मश्वरा
क्या
है
सुर्ख़
क्यूँ
हो
रहे
हैं
तेरे
कान
मैंने
तुझ
से
अभी
कहा
क्या
है
आँखें
मल
मल
के
देखता
हूँ
उसे
दोपहर
में
ये
चाँद
सा
क्या
है
मेरा
हम
-असर
सुब्ह
का
तारा
मेरे
बारे
में
जानता
क्या
है
सोचते
होंठ
बोलती
आँखें
हैराती
का
मुकलिमा
क्या
है
शोर
सा
उठ
रहा
है
चार
-तरफ
कुछ
गिरा
है
मगर
गिरा
क्या
है
मैं
यहाँ
से
पलटना
चाहता
हूँ
ऐ
ख़ुदा
तेरा
मश्वरा
क्या
है
जिस्म
के
उस
तरफ़
है
गुल
आबाद
फांद
दिवार
देखता
क्या
है
मेरी
ख़ुद
से
मुफाहामत
न
हुई
तू
बता
तेरा
मसाला
क्या
है
इस
लिए
बोलने
पे
हूँ
मजबूर
आप
सोचेंगे
सोचता
क्या
है
ये
बहुत
देर
में
हुआ
मालूम
इश्क़
क्या
है
मुघालता
क्या
है
मैं
तो
आदि
हूँ
खाक
छानने
का
तुम
बताओ
की
ढूँढ़ना
क्या
है
इश्क़
कर
के
भी
खुल
नहीं
पाया
तेरा
मेरा
मुआमला
क्या
है
मैं
बना
था
खनकती
मिटटी
से
मेरे
अंदर
सुकुट
सा
क्या
है
- Abbas Tabish
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टूटा
तो
हूँ
मगर
अभी
बिखरा
नहीं
'फ़राज़'
मेरे
बदन
पे
जैसे
शिकस्तों
का
जाल
हो
Ahmad Faraz
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बदन
का
सारा
लहू
खिंच
के
आ
गया
रुख़
पर
वो
एक
बोसा
हमें
दे
के
सुर्ख़-रू
है
बहुत
Zafar Iqbal
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मुझे
चाह
थी
किसी
और
की,
प
मुझे
मिला
कोई
और
है
मेरी
ज़िन्दगी
का
है
और
सच,
मेरे
ख़्वाब
सा
कोई
और
है
तू
क़रीब
था
मेरे
जिस्म
के,
बड़ा
दूर
था
मेरी
रूह
से
तू
मेरे
लिए
मेरे
हमनशीं
कोई
और
था
कोई
और
है
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Avtar Singh Jasser
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आईने
आँख
में
चुभते
थे
बिस्तर
से
बदन
कतराता
था
एक
याद
बसर
करती
थी
मुझे
मैं
साँस
नहीं
ले
पाता
था
Tehzeeb Hafi
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काम
आया
तिरंगा
कफ़न
के
लिए
कोई
क़ुर्बां
हुआ
था
वतन
के
लिए
सोचो
क्या
कर
लिया
तुमने
जी
कर
के
दोस्त
नस
भी
काटी
तो
बस
इक
बदन
के
लिए
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Neeraj Neer
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जिस्म
के
पार
जाना
पड़ा
था
कभी
इश्क़
कर
के
हुई
बंदगी
की
समझ
Neeraj Neer
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सच
तो
ये
है
'मजाज़'
की
दुनिया
हुस्न
और
इश्क़
के
सिवा
क्या
है
Asrar Ul Haq Majaz
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हम
इन
आँखों
से
उसे
हर
रोज़
पढ़ते
आए
हैं
वो
बदन
तो
याद
है
दो
के
पहाड़े
की
तरह
Ankit Maurya
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तुमने
कैसे
उसके
जिस्म
की
ख़ुशबू
से
इनकार
किया
उस
पर
पानी
फेंक
के
देखो
कच्ची
मिट्टी
जैसा
है
Tehzeeb Hafi
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कभी
देखा
नहीं
जिसने
बदन
के
आगे
कुछ
भी
भला
वो
क्यूँ
मुहब्बत
जावेदाना
ढूँढता
है
Chandan Sharma
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अब
नज़रअंदाज़
करने
की
भी
आसानी
नहीं
कौन
सी
सी
जा
है
जहाँ
मैं
ज़ेर-ए-निगरानी
नहीं
बात
कर
ऐ
ख़ूब-सूरत
शख़्स
कोई
बात
कर
और
साबित
कर
तुझे
कोई
परेशानी
नहीं
हम
गुज़ारिश
पर
गुज़ारा
कर
रहे
है
इन
दिनों
तुझ
सेे
तुझको
छीन
लेने
की
अभी
ठानी
नहीं
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Abbas Tabish
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मैं
अपने
बाद
बहुत
याद
आया
करता
हूँ
तुम
अपने
पास
न
रखना
कोई
निशानी
मेरी
Abbas Tabish
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मैं
तेरे
बाद
कोई
तेरे
जैसा
ढूँढता
हूँ
जो
बे-वफ़ाई
करे
और
बे-वफ़ा
न
लगे
Abbas Tabish
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हम
हैं
सूखे
हुए
तालाब
पे
बैठे
हुए
हंस
जो
तअ'ल्लुक़
को
निभाते
हुए
मर
जाते
हैं
Abbas Tabish
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शायद
किसी
बला
का
था
साया
दरख़्त
पर
चिड़ियों
ने
रात
शोर
मचाया
दरख़्त
पर
Abbas Tabish
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