gair ke saath kabhi zikr hamaara na karen | ग़ैर के साथ कभी ज़िक्र हमारा न करें

  - Abbas Ali Khan Bekhud
ग़ैरकेसाथकभीज़िक्रहमाराकरें
हमकोबद-नामकरेंइश्क़कोरुस्वाकरें
दिलयेकहताहैमुक़द्दरहैपरेशांरहना
अक़्लकहतीहैकिहमज़ुल्फ़कासौदाकरें
क्याज़रूरतहैबलाउनकीसंवारेगेसू
इकनज़रदेखलेंजिसकोउसेदीवानाकरें
क्यानहींजानतेहमरंग-ए-तलव्वुनउनका
मेहरबांपाएँभीतोअर्ज़-ए-तमन्नाकरें
'बेख़ुद'-ए-ज़ारकोअबदेखकेझुकजातीहैं
वोनिगाहेंजोकभीपासकिसीकाकरें
  - Abbas Ali Khan Bekhud
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