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Ajeetendra Aazi Tamaam
kab kisi ki peer samjhi kab kisi ka dard jaana
kab kisi ki peer samjhi kab kisi ka dard jaana | कब किसी की पीर समझी कब किसी का दर्द जाना
- Ajeetendra Aazi Tamaam
कब
किसी
की
पीर
समझी
कब
किसी
का
दर्द
जाना
अपना
ही
लिक्खा
गया
है
अपना
ही
गाया
गया
है
- Ajeetendra Aazi Tamaam
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हम
कुछ
ऐसे
उसके
आगे
अपनी
वफ़ा
रख
देते
हैं
बच्चे
जैसे
रेल
की
पटरी
पर
सिक्का
रख
देते
हैं
तस्वीर-ए-ग़म,
दिल
के
आँसू,
रंजो-नदामत,
तन्हाई
उसको
ख़त
लिखते
हैं
ख़त
में
हम
क्या
क्या
रख
देते
हैं
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Subhan Asad
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ये
ग़म
हमको
पत्थर
कर
देगा
इक
दिन
कोई
आ
कर
हमें
रुलाओ
पहले
तो
Siddharth Saaz
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मशहूर
भी
हैं
बदनाम
भी
हैं
ख़ुशियों
के
नए
पैग़ाम
भी
हैं
कुछ
ग़म
के
बड़े
इनाम
भी
हैं
पढ़िए
तो
कहानी
काम
की
है
Anjum Barabankvi
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ग़म-ए-दुनिया
भी
ग़म-ए-यार
में
शामिल
कर
लो
नश्शा
बढ़ता
है
शराबें
जो
शराबों
में
मिलें
Ahmad Faraz
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ऐ
ग़म-ए-ज़िंदगी
न
हो
नाराज़
मुझ
को
आदत
है
मुस्कुराने
की
Abdul Hamid Adam
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चारासाज़ो
मिरा
इलाज
करो
आज
कुछ
दर्द
में
कमी
सी
है
Azhar Nawaz
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ज़िंदगी
क्या
किसी
मुफ़लिस
की
क़बा
है
जिस
में
हर
घड़ी
दर्द
के
पैवंद
लगे
जाते
हैं
Faiz Ahmad Faiz
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लोग
हम
सेे
सीखते
हैं
ग़म
छुपाने
का
हुनर
आओ
तुमको
भी
सिखा
दें
मुस्कुराने
का
हुनर
क्या
ग़ज़ब
है
तजरबे
की
भेंट
तुम
ही
चढ़
गए
तुम
से
ही
सीखा
था
हमने
दिल
दुखाने
का
हुनर
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Kashif Sayyed
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कुल
जोड़
घटाकर
जो
ये
संसार
का
दुख
है
उतना
तो
मिरे
इक
दिल-ए-बेज़ार
का
दुख
है
शाइर
हैं
तो
दुनिया
से
अलग
थोड़ी
हैं
लोगों
सबकी
ही
तरह
हमपे
भी
घर
बार
का
दुख
है
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Ashutosh Vdyarthi
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ज़ख़्म
दिल
पर
हज़ार
करता
है
और
कहता
है
प्यार
करता
है
दर्द
दिल
में
उतर
गया
कैसे
कोई
अपना
ही
वार
करता
है
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Santosh S Singh
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जिगर
में
दर्द
हाथों
में
छलकता
जाम
होता
है
मोहब्बत
का
यही
तो
दोस्तो
इनआम
होता
है
Ajeetendra Aazi Tamaam
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कहते
हैं
सामिईन
उसे
जाम-ए-जम-ए-हुस्न
वो
जाम
बिन
पिए
ही
जो
बहकाए
आपको
Ajeetendra Aazi Tamaam
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धुआँ
होकर
निकलती
हैं
ये
साँसें
दिल
के
अंदर
से
किसी
की
याद
में
दिल
दम
ब
दम
जब
दम
लगाता
है
Ajeetendra Aazi Tamaam
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मेरी
जाँ
गिर
गिर
के
उठना
सीख
लो
वरना
तुमको
तोड़
देंगी
आँधियाँ
Ajeetendra Aazi Tamaam
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रंगतें
रंगों
ने
पाई
आपसे
आपको
रंगों
से
क्यूँ
परहेज़
है
जिस
सेे
चाहे
उस
सेे
होली
खेलिए
ज़िंदगी
हर
रंग
से
लबरेज़
है
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Ajeetendra Aazi Tamaam
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