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Ajeetendra Aazi Tamaam
badh gaii hai aadmi ki vahshiyat
badh gaii hai aadmi ki vahshiyat | बढ़ गई है आदमी की वहशियत
- Ajeetendra Aazi Tamaam
बढ़
गई
है
आदमी
की
वहशियत
जा
परिंद
अब
आशियाना
छोड़कर
- Ajeetendra Aazi Tamaam
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इसी
लिए
तो
यहाँ
अब
भी
अजनबी
हूँ
मैं
तमाम
लोग
फ़रिश्ते
हैं
आदमी
हूँ
मैं
Bashir Badr
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सारे
ग़म
भूल
गए
आपके
रोने
पे
मुझे
किसको
ठंडक
में
पसीने
का
ख़्याल
आता
है
आखरी
उम्र
में
जाते
है
मदीने
हम
लोग
मरने
लगते
है
तो
जीने
का
ख़याल
आता
है
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Nadir Ariz
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क़ब्रों
में
नहीं
हम
को
किताबों
में
उतारो
हम
लोग
मोहब्बत
की
कहानी
में
मरे
हैं
Ajaz tawakkal
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उसके
अच्छे
शे'र
नहीं
भाते
हमको
जो
अच्छा
इंसान
नहीं
बन
पाता
है
Tanoj Dadhich
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इश्क़
जब
तक
न
कर
चुके
रुस्वा
आदमी
काम
का
नहीं
होता
Jigar Moradabadi
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रो
रहा
है
बशर
मगर
देखो
ज़िन्दगी
को
रफ़ू
नहीं
करता
Tarun Pandey
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जिस
ने
इस
दौर
के
इंसान
किए
हैं
पैदा
वही
मेरा
भी
ख़ुदा
हो
मुझे
मंज़ूर
नहीं
Hafeez Jalandhari
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अच्छों
से
पता
चलता
है
इंसाँ
को
बुरों
का
रावन
का
पता
चल
न
सका
राम
से
पहले
Rizwan Banarasi
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कुछ
लोग
ख़यालों
से
चले
जाएँ
तो
सोएँ
बीते
हुए
दिन
रात
न
याद
आएँ
तो
सोएँ
Habib Jalib
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बहुत
से
लोग
हैं
तस्वीर
में
अच्छे
बहुत
अच्छे
तेरे
चेहरे
पे
ही
मेरी
नज़र
हरदम
ठहरती
है
Umesh Maurya
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मौत
गर
आई
तो
क्या
बोलेंगे
हम
ज़िंदगी
थोड़ा
तो
ज़िंदा
छोड़
दे
Ajeetendra Aazi Tamaam
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जितना
जी
चाहे
दिलों
से
खेल
लो
पर
ख़ुशी
फिर
भी
नहीं
होगी
तुम्हें
और
भी
लाखों
सजाएँ
हैं
यहाँ
माना
की
फाँसी
नहीं
होगी
तुम्हें
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Ajeetendra Aazi Tamaam
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तुम
क्या
जानो
बिन
बरसे
बादल
का
दुख
क्या
होता
है
जाने
कितने
आँसू
आँखों
तक
आकर
रुक
जाते
हैं
Ajeetendra Aazi Tamaam
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हुस्न
उसका
है
नूर
का
दरिया
और
वो
माहताब
की
सी
है
Ajeetendra Aazi Tamaam
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जान
यूँँ
ही
फ़ना
नहीं
करते
दुश्मनों
का
भला
नहीं
करते
आदतन
जो
हैं
वो
ही
रहते
हैं
लोग
कुछ
भी
नया
नहीं
करते
जिनकी
फ़ितरत
में
बेवफ़ाई
हो
वो
कभी
भी
वफ़ा
नहीं
करते
ताक
पे
रखते
हैं
अना
तक
दिल
हम
रफ़ाक़त
को
क्या
नहीं
करते
रोज़
खाते
हैं
क़स
में
वो
हम
सेे
पर
हमारा
कहा
नहीं
करते
जो
नहीं
मानते
ख़ता
अपनी
वो
किसी
के
हुआ
नहीं
करते
ख़ासियत
है
ये
धोकेबाज़ों
की
सामने
से
दग़ा
नहीं
करते
सच
बताकर
तमाम
झूठे
लोग
झूठ
को
बे-मज़ा
नहीं
करते
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Ajeetendra Aazi Tamaam
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