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Aatish Indori
meri deewaangi se vo khafa tha
meri deewaangi se vo khafa tha | मेरी दीवानगी से वो ख़फ़ा था
- Aatish Indori
मेरी
दीवानगी
से
वो
ख़फ़ा
था
सफ़र
में
साथ
छोड़ेगा
पता
था
- Aatish Indori
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शर्तें
लगाई
जाती
नहीं
दोस्ती
के
साथ
कीजे
मुझे
क़ुबूल
मिरी
हर
कमी
के
साथ
Waseem Barelvi
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साथ
में
तू
मेरे
दो
गाम
तो
चल
सकता
है
इतना
चलने
से
मेरा
काम
तो
चल
सकता
है
तेरे
दिल
में
किसी
शायर
की
जगह
तो
होगी
इस
इलाके
में
मेरा
नाम
तो
चल
सकता
है
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Ashu Mishra
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तेरे
साथ
भी
मुश्किल
पड़ता
था
तेरे
बिन
तो
गुजारा
क्या
होता
गर
तू
भी
नहीं
होता
तो
न
जाने
दोस्त
हमारा
क्या
होता
Siddharth Saaz
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तुम
अगर
साथ
देने
का
वा'दा
करो
मैं
यूँँही
मस्त
नग़्में
लुटाता
रहूँ
तुम
मुझे
देख
कर
मुस्कुराती
रहो
मैं
तुम्हें
देख
कर
गीत
गाता
रहूँ
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Sahir Ludhianvi
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कुछ
तो
हवा
भी
सर्द
थी
कुछ
था
तिरा
ख़याल
भी
दिल
को
ख़ुशी
के
साथ
साथ
होता
रहा
मलाल
भी
Parveen Shakir
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ये
ज़ुल्फ़
अगर
खुल
के
बिखर
जाए
तो
अच्छा
इस
रात
की
तक़दीर
सँवर
जाए
तो
अच्छा
जिस
तरह
से
थोड़ी
सी
तेरे
साथ
कटी
है
बाक़ी
भी
उसी
तरह
गुज़र
जाए
तो
अच्छा
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Sahir Ludhianvi
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रात
हो,
चाँद
हो,
बारिश
भी
हो
और
तुम
भी
हो
ऐसा
मुमकिन
ही
नहीं
है
कि
कभी
हो
मिरे
साथ
Faiz Ahmad
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मैं
अकेला
ही
चला
था
जानिब-ए-मंज़िल
मगर
लोग
साथ
आते
गए
और
कारवाँ
बनता
गया
Majrooh Sultanpuri
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बारिशें
जाड़े
की
और
तन्हा
बहुत
मेरा
किसान
जिस्म
और
इकलौता
कंबल
भीगता
है
साथ-साथ
Parveen Shakir
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निभाया
जिस
सेे
भी
रिश्ता
तो
फिर
हद
में
रहे
हैं
हम
किसी
के
मखमली
तकिए
के
ऊपर
सर
नहीं
रक्खा
Nirbhay Nishchhal
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आदतन
मुझको
प्यार
करना
है
आदतन
उसको
वार
करना
है
जीतने
वाले
शाम
को
मिलना
हार
का
जश्न
यार
करना
है
नद्दी
ने
पार
कर
लिया
पर्वत
अब
समुंदर
को
पार
करना
है
रूह
तो
मेरे
पास
है
उसकी
जिस्म
का
इंतिज़ार
करना
है
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Aatish Indori
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अलग
हूँ
सब
से
पर
कम-तर
नहीं
हूँ
दिलों
में
हूँ
कोई
बे-घर
नहीं
हूँ
मेरी
तौहीन
तुम
कैसे
करोगे
मैं
कब
से
जिस्म
के
अंदर
नहीं
हूँ
हमारा
साथ
इक
संयोग
हैं
बस
सफ़र
में
हूँ
मैं
भी
रहबर
नहीं
हूँ
रहूँगा
सामने
आँखों
के
हर-दम
गुज़र
जाए
जो
वो
मंज़र
नहीं
हूँ
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Aatish Indori
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कोशिश
तो
की
लेकिन
भुला
नहीं
पाए
एक
यही
वा'दा
हम
निभा
नहीं
पाए
धरती
बंजर
नहीं
थी
हम
ही
बंजर
थे
दूजा
कोई
रिश्ता
उगा
नहीं
पाए
पाई
हमने
भी
थी
मुहब्बत
की
दौलत
हम
सोना
चाँदी
पर
पचा
नहीं
पाए
बाद
में
सबको
इसका
मलाल
होता
है
माता-पिता
का
क़र्ज़ा
चुका
नहीं
पाए
क्या
करता
वो
तो
चारा-गर
भी
निकला
पीड़ा
अपनी
उस
सेे
छुपा
नहीं
पाए
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Aatish Indori
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करी
जो
बात
तो
रिश्ता
निकल
आया
सर-ए-राह
अजनबी
अपना
निकल
आया
दुआएँ
दिल
से
माँगी
तो
असर
देखो
समुंदर
से
मेरा
दरिया
निकल
आया
बची
थी
दूरी
जब
दो-चार
क़दमों
की
हमारे
बीच
में
सहरा
निकल
आया
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Aatish Indori
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मेरा
इतना
ख़याल
कर
लेते
कोई
मुश्किल
सवाल
कर
लेते
इतना
मुझ
पर
नवाल
कर
लेते
हिज्र
का
कुछ
मलाल
कर
लेते
तुमको
जब
मेरी
इतनी
चिंता
थी
मुझ
सेे
रिश्ता
बहाल
कर
लेते
उम्र
भर
के
लिए
बिछड़ना
था
मिल
के
थोड़ा
धमाल
कर
लेते
यार
बोसे
में
और
मज़ा
आता
थोड़ा
चहरे
को
लाल
कर
लेते
सीधा
सीधा
जबाब
चाहिए
था
सीधा
सीधा
सवाल
कर
लेते
मैं
तो
ग़म
भी
नहीं
कमा
पाया
आप
लेकिन
कमाल
कर
लेते
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Aatish Indori
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