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Aatish Indori
zor se kheenchne se taar bikhar jaayega
zor se kheenchne se taar bikhar jaayega | ज़ोर से खींचने से तार बिखर जाएगा
- Aatish Indori
ज़ोर
से
खींचने
से
तार
बिखर
जाएगा
मोतियों
से
बना
ये
हार
बिखर
जाएगा
एक
बस
आप
ही
हैं
जिस
पे
लुटाया
सब
है
आपके
जाने
से
संसार
बिखर
जाएगा
दिल
तो
कहता
है
तुम्हारा
कि
मुआफ़ी
माँगो
डर
रहे
हो
कि
अहंकार
बिखर
जाएगा
मसअले
हैं
तो
ये
बेहतर
है
कि
हल
कर
लीजे
यूँँ
झगड़ने
से
तो
घर-बार
बिखर
जाएगा
- Aatish Indori
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घर
में
भी
दिल
नहीं
लग
रहा
काम
पर
भी
नहीं
जा
रहा
जाने
क्या
ख़ौफ़
है
जो
तुझे
चूम
कर
भी
नहीं
जा
रहा
रात
के
तीन
बजने
को
है
यार
ये
कैसा
महबूब
है
जो
गले
भी
नहीं
लग
रहा
और
घर
भी
नहीं
जा
रहा
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Tehzeeb Hafi
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जो
मेरे
साथ
मोहब्बत
में
हुई
आदमी
एक
दफा
सोचेगा
रात
इस
डर
में
गुजारी
हमने
कोई
देखेगा
तो
क्या
सोचेगा
Tehzeeb Hafi
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अब
तो
उस
सूने
माथे
पर
कोरेपन
की
चादर
है
अम्मा
जी
की
सारी
सजधज,
सब
ज़ेवर
थे
बाबूजी
कभी
बड़ा
सा
हाथ
ख़र्च
थे
कभी
हथेली
की
सूजन
मेरे
मन
का
आधा
साहस,
आधा
डर
थे
बाबूजी
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Aalok Shrivastav
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कल
जहाँ
दीवार
थी
है
आज
इक
दर
देखिए
क्या
समाई
थी
भला
दीवाने
के
सर
देखिए
Javed Akhtar
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जाने
से
कोई
फ़र्क़
ही
उसके
नहीं
पड़ा
क्या
क्या
समझ
रहा
था
बिछड़ने
के
डर
को
मैं
Shariq Kaifi
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भले
हैं
फ़ासले
क़ुर्बत
से
ख़ौफ़
लगता
है
ये
क्या
बला
है
जो
ऐसी
विरानी
क़ैद
हुई
Prashant Beybaar
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मौत
को
हम
ने
कभी
कुछ
नहीं
समझा
मगर
आज
अपने
बच्चों
की
तरफ़
देख
के
डर
जाते
हैं
Shakeel Jamali
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मैं
हूँ
दिल
है
तन्हाई
है
तुम
भी
होते
अच्छा
होता
Firaq Gorakhpuri
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ख़ाली
पड़ा
है
और
उदासी
भरा
है
दिल
सो
लोग
इस
मकान
से
आगे
निकल
गए
Ankit Maurya
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मेरे
ही
संग-ओ-ख़िश्त
से
तामीर-ए-बाम-ओ-दर
मेरे
ही
घर
को
शहर
में
शामिल
कहा
न
जाए
Majrooh Sultanpuri
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तुम
सबका
लपाड़ो
मैं
बाप
रहा
हूँ
तुम
सब
से
ज़ियादा
मैं
छाप
रहा
हूँ
तुम
कहके
पुकारा
तो
झटका
न
खाओ
तुम
अब
हुआ
मुद्दत
मैं
आप
रहा
हूँ
अच्छा
है
कि
रोना
ले
के
नहीं
आए
इक
का
नहीं
सब
का
संताप
रहा
हूँ
तैराक़
नहीं
हूँ
तो
क्या
हुआ
यारो
पैरों
से
मैं
नद्दी
को
नाप
रहा
हूँ
ख़ुद
की
कभी
मुझ
सेे
तुलना
नहीं
करना
सब
सेे
बड़ी
चाहत
की
माप
रहा
हूँ
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Aatish Indori
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आपका
फ़ोन
व्यस्त
आता
है
फ़ोन
पर
किस
से
बात
करती
हो
Aatish Indori
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मोहब्बत
ने
मुझे
औक़ात
दिखला
दी
ज़रूरी
क्यूँँ
है
धन
ये
बात
सिखला
दी
Aatish Indori
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चाहती
हो
सौंप
दूँ
दिल
तुमको
पर
ज़िंदा
रहूँ
इसका
मतलब
लाश
हो
जाऊँ
मगर
ज़िंदा
रहूँ
Aatish Indori
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रेलगाड़ी
की
तरह
हम
हैं
गुज़रने
वाले
अब
नहीं
हम
तेरे
कहने
पे
ठहरने
वाले
एक
तो
हम
नहीं
सद
में
से
उबरने
वाले
दूसरा
यह
है
कि
जल्दी
नहीं
मरने
वाले
रेलगाड़ी
से
ही
देखेंगे
तेरे
शहर
को
हम
नहीं
गलियों
में
तेरी
फिर
से
विचरने
वाले
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Aatish Indori
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