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Aatish Indori
yuñ nahin tha ki savaalaat se munh mod liya
yuñ nahin tha ki savaalaat se munh mod liya | यूँँ नहीं था कि सवालात से मुँह मोड़ लिया
- Aatish Indori
यूँँ
नहीं
था
कि
सवालात
से
मुँह
मोड़
लिया
ज़िंदगी
ने
मेरी
हर
बात
से
मुँह
मोड़
लिया
जो
ज़रूरी
है
वो
सब
कुछ
तो
मिला
है
मुझको
इसलिए
मैंने
शिकायात
से
मुँह
मोड़
लिया
ख़ूब
प्यासे
भी
थे
और
ख़ूब
सदाएँ
भी
दीं
देर
से
बरसा
तो
बरसात
से
मुँह
मोड़
लिया
रूठ
तो
दिल
भी
गया
जब
से
मोहब्बत
रूठी
इस
ने
हर
तरह
के
जज़्बात
से
मुँह
मोड़
लिया
- Aatish Indori
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ख़यालों
के
घने
जंजाल
में
ख़ुद
फँस
गया
हूँ
बचाओ
दोस्तों
दलदल
में
गहरे
धँस
गया
हूँ
Aatish Indori
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माँग
कर
पैसे
ख़फ़ा
मैंने
किया
दोस्तों
को
बे-वफ़ा
मैंने
किया
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मेरी
आँखों
ने
अब
तक
वीराने
देखे
हैं
मूमल
जैसे
दर्द
भरे
अफ़साने
देखे
हैं
Aatish Indori
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आग
है
पर
धुआँ
नहीं
होता
दिल
में
क्या
है
बयाँ
नहीं
होता
एक
दुनिया
वहाँ
बसानी
है
शख़्स
तन्हा
जहाँ
नहीं
होता
या
तो
बचपन
है
या
बुढ़ापा
है
बोन्साई
जवाँ
नहीं
होता
दरमियाँ
कोई
फिर
भी
होता
है
कोई
जब
दरमियाँ
नहीं
होता
भीड़
में
हूँ
तो
क्या
हुआ
'आतिश'
शख़्स
तन्हा
कहाँ
नहीं
होता
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Aatish Indori
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यार
तुम
बद-नसीब
कैसे
हो
बाप
है
फिर
गरीब
कैसे
हो
आप
अटके
शिया
और
सुन्नी
में
फिर
ख़ुदा
के
क़रीब
कैसे
हो
ख़ुद
की
थाली
में
छेद
कर
डाला
यार
इतने
अजीब
कैसे
हो
बूढ़े
बरगद
की
छाँव
में
हो
तुम
बेटे
फिर
ग़म-नसीब
कैसे
हो
तुम
सेे
पूरी
हुई
कहानी
यह
दोस्त
हो
तुम
रक़ीब
कैसे
हो
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