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Aatish Indori
teri aur uski kahaanii khol saktaa hooñ
teri aur uski kahaanii khol saktaa hooñ | तेरी और उसकी कहानी खोल सकता हूँ
- Aatish Indori
तेरी
और
उसकी
कहानी
खोल
सकता
हूँ
मैं
मोहब्बत
के
मआनी
खोल
सकता
हूँ
आपको
थोड़ी
मुझे
यह
फ़ख़्र
हासिल
है
सामने
सबके
जवानी
खोल
सकता
हूँ
मेरे
बच्चे
जब
हुए
तब
अक़्ल
आई
है
अब
पिता
होने
के
मानी
खोल
सकता
हूँ
सच
छुपाना
है
तो
मुझको
मार
दो
गोली
मैं
कभी
भी
यह
कहानी
खोल
सकता
हूँ
- Aatish Indori
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झुक
के
हम
पायदान
बनते
हैं
आप
चढ़
के
महान
बनते
हैं
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मिलो
तो
साब-साब
मत
करना
दूजा
भाषा
ख़राब
मत
करना
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ज़ोर
से
खींचने
से
तार
बिखर
जाएगा
मोतियों
से
बना
ये
हार
बिखर
जाएगा
एक
बस
आप
ही
हैं
जिस
पे
लुटाया
सब
है
आपके
जाने
से
संसार
बिखर
जाएगा
दिल
तो
कहता
है
तुम्हारा
कि
मुआफ़ी
माँगो
डर
रहे
हो
कि
अहंकार
बिखर
जाएगा
मसअले
हैं
तो
ये
बेहतर
है
कि
हल
कर
लीजे
यूँँ
झगड़ने
से
तो
घर-बार
बिखर
जाएगा
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मेरा
इतना
ख़याल
कर
लेते
कोई
मुश्किल
सवाल
कर
लेते
इतना
मुझ
पर
नवाल
कर
लेते
हिज्र
का
कुछ
मलाल
कर
लेते
तुमको
जब
मेरी
इतनी
चिंता
थी
मुझ
सेे
रिश्ता
बहाल
कर
लेते
उम्र
भर
के
लिए
बिछड़ना
था
मिल
के
थोड़ा
धमाल
कर
लेते
यार
बोसे
में
और
मज़ा
आता
थोड़ा
चहरे
को
लाल
कर
लेते
सीधा
सीधा
जबाब
चाहिए
था
सीधा
सीधा
सवाल
कर
लेते
मैं
तो
ग़म
भी
नहीं
कमा
पाया
आप
लेकिन
कमाल
कर
लेते
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बेवजह
के
ख़याल
आते
हैं
रात
दिन
एहतिमाल
आते
हैं
तेरा
जब
भी
ख़याल
आता
है
मन
में
ढेरों
सवाल
आते
हैं
आपको
एक
बार
क्या
देखा
ख़्वाब
में
अब
ग़ज़ाल
आते
हैं
वस्ल
की
रात
ख़त्म
होने
पर
हिज्र
के
माह-ओ-साल
आते
हैं
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