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Aatish Indori
pakke ghar kehne ko hi pakke the
pakke ghar kehne ko hi pakke the | पक्के घर कहने को ही पक्के थे
- Aatish Indori
पक्के
घर
कहने
को
ही
पक्के
थे
वे
तो
कच्चे
घरों
से
कच्चे
थे
तब
नहीं
चलती
थी
दवा-गोली
हम
तो
कंगाली
में
ही
अच्छे
थे
ज़िंदगी
अपनी
ख़ुद
तबाह
की
है
मेरे
कमबख़्त
कान
कच्चे
थे
तुम
तो
सच
बोल
सकते
थे
भाई
मेरे
घर
में
तो
बाल-बच्चे
थे
शहर
घुसपैठ
किस
तरह
करता
गाँव
जाने
के
मार्ग
कच्चे
थे
शहर
को
गाँव
रोकता
कब
तक
शहर
के
पास
ढेर
गच्चे
थे
इस
धरा
पर
ही
स्वर्ग
बसता
था
जब
तलक
दिल
हमारे
सच्चे
थे
दरमियाँ
आ
गई
हैं
दीवारें
घर
बसाने
से
पहले
अच्छे
थे
- Aatish Indori
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मुझको
तो
तेरी
हीर
बनना
था
तुझको
पर
मेरी
पीर
बनना
था
बे-वफ़ाई
ही
अच्छी
कर
लेते
इक
मुकम्मल
नज़ीर
बनना
था
मैं
लगा
था
ख़ुदा
बनाने
में
पर
तुझे
मेरी
पीर
बनना
था
गुल
ही
था
दिल
में
आने
के
पहले
घुसने
के
बाद
तीर
बनना
था
उसने
तो
राज-पाट
छोड़
दिया
मुझको
जिसका
वज़ीर
बनना
था
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ख़ुद
को
बीमार
मत
किया
कर
यार
डूब
कर
प्यार
मत
किया
कर
यार
जब
मदद
चाहे
कोई
ग़ैरतमंद
तब
तो
इनकार
मत
किया
कर
यार
एक
छोटी
सी
है
मेरी
दरख़्वास्त
पीठ
पर
वार
मत
किया
कर
यार
ख़ुद
के
खाने
के
लाले
पड़
जाएँ
इतना
उपकार
मत
किया
कर
यार
दिल
को
जाना
जहाँ
है
जाने
दे
दिल
से
तकरार
मत
किया
कर
यार
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धीरे-धीरे
से
जल
रहे
हैं
हम
मौत
की
ओर
चल
रहे
हैं
हम
दूर
रहिए
उबल
रहे
हैं
हम
आजकल
सच
उगल
रहे
हैं
हम
हम
मिलेंगे
तुम्हें
किताबों
में
ढेर-अभावों
में
पल
रहे
हैं
हम
ज़िंदगी
अपना
लेना
अब
हमको
तेरे
साँचे
में
ढल
रहे
हैं
हम
भूक
इतनी
बड़ी
कि
आलम
है
ख़ुद
ही
ख़ुद
को
निगल
रहे
हैं
हम
दूर
से
ही
सलाम
कर
लेना
आइना
बन
टहल
रहे
हैं
हम
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ख़ूब
बातें
करती
थी,
अंजान
लेकिन
अब
हुई
जानता
पहले
से
था,
पहचान
लेकिन
अब
हुई
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हमारे
हौसलों
को
पाँव
देते
हैं
पिता
धूप
ओढ़ते
हैं
छाँव
देते
हैं
तुम्हारे
शहर
में
ये
मसअला
होगा
हमारे
गाँव
में
सब
छाँव
देते
हैं
ये
दुनिया
तो
बना
देती
है
घनचक्कर
जिनालय
और
शिवालय
ठाँव
देते
हैं
इसी
लालच
से
आँगन
में
जगह
दे
दो
बड़े
बूढ़े
घनेरी
छाँव
देते
हैं
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